.दृष्टिकोण •..!!
दृष्टिकोण को परिवर्तन कर, चश्मे तेरे हे
वास्तविक नज़र से देख, सितारे तेरे हे।
गर देख पाये तो देख ,वो लहर तेरे मन की,
और निभा पाये तो देख, मजबूती अपने मन की।
देख गुणवत्ता अपने आचरण की, मुखौटे सारे तेरे हे,
देख पाया लोगों में खुद को, उत्कृष्ट क्वालिटी तेरी हे।
देख ली आभासी दुनिया,सारे यह भूत भविष्य हे,
तु देख ले अंतर्मन को,सारा यथार्थ तु खुद में हे।
मालिक बन जा अपने मन का,तु स्वयं खुद का स्वामी हे,
बस धैर्य रख और ध्यान लगा,यह दुनिया तेरी हे..!!💯
लेखिका:-नीतू नागर UPSC aspirants and mentor/poet/ women improvement helper
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