शिर्षक -अजब की गजब दुनिया
विधा -कविता
मौलिक रचना
**अजब की गजब दुनिया**
दुनिया है अजब, गजब का मेला सजा,
कभी हंसी बिखरे, कभी आंसू बहा।
एक तरफ अमीर सोने में नहाए,
दूसरी ओर गरीब भूखे तड़पाए।
राजा बन बैठे चोर चालाक बने,
ईमानदार सड़क पर ठोकर खाए।
मोबाइल में खोए लोग असली संसार,
वर्चुअल दोस्तों से मिले प्यार।
बारिश में भीगें सूखे सपने उड़ान,
धूप में जलें ठंडे दिलों का दमण।
प्यार हो जाए दुश्मनी में बदल,
दुश्मनी भी मुस्कान से हो जाए फल।
समय की धारा में बहते सब दीवाने,
कल का पता न कोई जाने।
अजब गजब ये लीला है निराली,
हंसते-रोते चलो, यही जिंदगानी।
रचनाकार - "कौशल"
छत्तीसगढ़
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अजब की गज़ब दुनिया
अजब की गज़ब दुनिया
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