कलम संगिनी

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माँ पद्मा मिश्रा के लिये

adi.s.mishra

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माँ पद्मा मिश्रा के लिये

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माँ पद्मा मिश्रा के लिये
माँ पद्मा मिश्रा के लिए ❤️ कैंसर लौट आया है, पर माँ, आपकी जिंदादिली उससे कहीं बड़ी है। आपके हौसले की रोशनी में हम सबको यकीन है ये वक़्त भी बीत जाएगा। जब डॉक्टर दवाओं की ईलाज की बात करते हैं, आप उम्मीद की बात करती हैं। जब हम डरते हैं, आप हौसलों को और मजबूत कर लेती हैं। इतने कष्ट के बावजूद ये मुस्कान कहाँ से लाती हैं आप? ये हिम्मत, ये उम्मीद, ये रोशनी— कौन देता है आपको ? आपके सिरहाने बैठकर मैं रोज़ यही सोचती हूँ— कितनी बड़ी ताकत है आपके अंदर। आपकी आँखों में जो उम्मीद है, शायद वही हमारा साहस है। आपकी हर साँस, हर मुस्कान, हर कोशिश— हमारे लिए आशीर्वाद है। माँ, आप लड़ रही हैं और आप जितेंगी भी क्योंकि हिम्मत, प्यार और सहने की असीम ताकत तो आपके ही पास है। और हम सब आपके साथ खड़े हैं— हमेशा। डॉ रंजना द्विवेदी, लखनऊ

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