कलम संगिनी

कलम संगिनी

आदित्यायन साहित्य दर्पण: गंगा माता की महिमा

adi.s.mishra

adi.s.mishra

3 Followers 147 Posts Aug 2025

आदित्यायन साहित्य दर्पण: गंगा माता की महिमा

28 Views
0 Likes 0 Comments
0 Saves
0 Shares
आदित्यायन साहित्य दर्पण: गंगा माता की महिमा
*गंगा नदी की महिमा व धार्मिक एवम् भौगोलिक महत्व* भारत में नदियों को हमेशा माँ का दर्जा दिया गया है और किसी न किसी तरह से उनका धार्मिक महत्व होता है साथ ही भौगोलिक रूप से भी अति महत्व पूर्ण होती हैं। परंतु सभी नदियों में माँ गंगा की विशेष महिमा है। कहा जाता है कि गंगा स्नान मात्र से सारे पाप धुल जाते हैं। माँ गंगा का धार्मिक महत्व के साथ साथ वैज्ञानिक महत्व भी है। गंगा नदी अपने विशेष जल और इसके विशेष औषधीय गुणों के कारण मूल्यवान मानी जाती है। इनका जल अपनी शुद्धता और पवित्रता को लम्बे समय तक बनाये रखता है। माना जाता है कि गंगा का जन्म भगवान् विष्णु के चरणों से हुआ था। साथ ही यह शिव जी की जटाओं में निवास करती हैं। गंगा स्नान, पूजन और दर्शन करने से पापों का नाश होता है, व्याधियों से मुक्ति होती है, जो तीर्थ गंगा किनारे बसे हुए हैं, वे अन्य की तुलना में ज्यादा पवित्र माने जाते हैं।जैसे गंगोत्री, देवप्रयाग, ऋषिकेश, हरिद्वार, गढ़मुक्तेश्वर, बिठूर, कानपुर, प्रयाग, वाराणसी, मिर्ज़ापुर, ग़ाज़ीपुर, बक्सर, पटना, भागलपुर, कोलकाता आदि। इन्ही धार्मिक स्थानों में गंगा नदी के तटों पर महत्वपूर्ण धार्मिक स्थान/ देवालय भी स्थित हैं। माँ गंगा का जन्म: देवी गंगा के जन्म को लेकर कई कथायें प्रचलित हैं। वामन पुराण के अनुसार, जब श्रीहरि विष्णु ने वामन स्वरूप में अपना एक पैर आकाश की ओर रखा था, उस दौरान ब्रह्मदेव ने उनके श्री चरणों को जल से धोकर अपने कमंडल में भर लिया था। इस पवित्र जल के तेज और शक्ति से ब्रह्मा जी के कमंडल में देवी गंगा का जन्म हुआ था। इसके साथ ही गंगा सप्तमी का दिन मां गंगा के जन्मदिन के रूप में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को बड़ी धूमधाम के साथ यह तिथि मनाई जाती है। ग्रंथों के अनुसार, इसी दिन ब्रह्मा जी के कमंडल से मां गंगा का जन्म हुआ था, जिसकी कथा का जिक्र हमने यहाँ किया है। इस दिन से जुड़ी देवी गंगा की पौराणिक कथा: वामन पुराण के अनुसार, जब श्रीहरि विष्णु ने वामन स्वरूप में अपना एक पैर आकाश की ओर रखा था, उस दौरान ब्रह्मा जी ने उनके श्री चरणों को जल से धोकर अपने कमंडल में भर लिया था। इस पवित्र जल के तेज और शक्ति से ब्रह्मा जी के कमंडल में देवी गंगा का जन्म हुआ था। इसके बाद ब्रह्मा जी ने उन्हें हिमालय राज को सौंप दिया था। तभी से मां गंगा और देवी पार्वती बहन मानी जाती हैं।राजा भगीरथ ने तपस्या करके शिव की जटाओं में विराजमान माँ गंगा को धरती में लाकर अपने साठ हज़ार पूर्वजों का उद्धार किया था। मां गंगा का पूजन मंत्र:- ॐ नमो गंगायै विश्वरुपिणी नारायणी नमो नम:। गंगा गंगेति यो ब्रूयात, योजनानाम् शतैरपि। मुच्यते सर्वपापेभ्यो, विष्णुलोके। लेखक : डॉ कर्नल आदि शंकर मिश्र ‘आदित्य’, ‘विद्यावाचस्पति’ लखनऊ

Comments (0)

Click to view
Footer