कलम संगिनी

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तोर बिन मन हावय सूना

HARNARAYAN KURREY

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1 Followers 99 Posts Oct 2025

तोर बिन मन हावय सूना

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--- शिर्षक: “तोर बिन मन हावय सूना” (रचनाकार – कौशल) (1) चाँदनी रात मं, तोर सुरता जागे, मन मोर रोवत रहय, तारे संग लागे। हवा के संग-संग तोर नाम गुनगुनाय, तोर बिन ये जीवन अब सूना लगाय। तोर बिन मन हावय सूना रे, तोर बिन मन हावय सूना। (2) बरगद के डार मं चिरई रोवत हे, मोर दिल घलो अब टूटत रोवत हे। अँधियार गहराय, उजाला खो गेय, सपना मं देखथंव, तन घलो खो गेय। तोर बिन मन हावय सूना रे, तोर बिन मन हावय सूना। (3) झरना के सुर मं गम घुल गेय हे, आँखरी आसू ले मन धुल गेय हे। जगत हँसत हे, मोर आँसु लुकाय, हँसी के पीरा अब गीत बनाय। तोर बिन मन हावय सूना रे, तोर बिन मन हावय सूना। (4) गाँव के रस्ता, ओ बैठोईया चौरा, सब्बो जगह तोर सुरता घलो ठहरा। दिन ल बिसराय, रतिया नई कटय, तोर नाव गावत, मन रोवत रहय। तोर बिन मन हावय सूना रे, तोर बिन मन हावय सूना। --

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