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*नमस्कार, good evening, जय श्री राम, जय हिंद, वन्दे मातरम् ।*
*पुन: समाज को आध्यात्मिक व वैचारिक क्रांति की आवश्यकता महसूस हो रही है*
आज के संक्रमण काल में हमारी युवापीढ़ी के सामने किसी सजीव आदर्श प्रस्तुत करने वाले व्यक्तित्व का न होना उसे समाज में जिस तरह लक्ष्यविहीनता की दिशा की ओर लिए जा रहा है एवं इसी वजह से सारे विश्व में आज चारो ओर युवा पीढ़ी को विध्वंसक गतिविधियों में संलिप्त पाया जा रहा है, वह बहुत ही विध्वंसक व अनिष्टकारी समाज का द्योतक बनता हुआ प्रतीत होता है।
वर्तमान समय के तथाकथित राजनेता, धार्मिक कर्णधार व समाज के स्वयंभू ठेकेदार अपनी विक्रत छवि को चमकाने की क्षुद्र स्वार्थपूर्ति हेतु उन्हें जब चाहें जिस - तिस दिशा में मोड़ देते हैं और उनका भविष्य चौपट करने में सारी शक्ति लगा देने में कोई संकोच नहीं करते हैं।
एक ओर आज वैज्ञानिक प्रगति अपने चरम पर लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रही है और हमारे युवाओं की प्रतिभा नए नए अविष्कार करती जा रही है, वहीं दूसरी ओर अधिकांश पढा - लिखा बेरोजगार युवा मस्तिष्क लक्ष्यविहीन होकर दूसरों के हाथ की कठपुतली बनता हुआ अपनी क्षमता व ऊर्जाशक्ति का विध्वंसात्मक अपभोग कर रहा है।
इस अंधकार की ज्वलंत व सोचनीय परिस्थिति में श्री राम, श्री कृष्ण, स्वामी विवेकानन्द, गौतम बुद्ध, गुरु नानक व महात्मा गांधी जैसी किसी प्रखर प्रतिभा एवं आदर्शवान व्यक्तित्व का मार्ग दर्शन ही उन्हें सही दिशा दे सकता है।
ऐसे समय में जब मानव समाज एक ऐसी स्थिति में से उभर कर ऊपर उठना चाह रहा है, जिसमे उसे दूसरे अधिनायकत्व व एकात्मवाद वाले व्यक्तियों के प्रभुत्व को मानकर रहना व चलना पड़ता है, अब वह एक ऐसी परिस्थिति में प्रवेश कर रहा है, जिसमे पूर्णतः स्वयं आत्मनिर्भर होकर निर्णायक बन सकता है । इसलिए भी आज समाज को दिग्दर्शक के रूप में सृजनात्मक प्रतिभावान आदर्श महापुरुषों की पुन: आवश्यकता आ पड़ी है एवं हमारी भटकती हुई युवा पीढ़ी को अपना लक्ष्य निर्धारित करने के लिए अंतर्दृष्टि से संपन्न, कल्पनाशक्ति से समृद्ध, भविष्य को पहले से जान लेने वाले सन्तो - ऋषियों मुंनियों की जरूरत भी है न कि आत्ममुग्ध प्रचारकों व प्रसारकों की । आज फिर से समग्र विश्व को मौलिक प्रतिभावान, चिंतनशील, चरित्रवान व रचनात्मक सोच के धनी व्यक्तित्व की आवश्यकता है, जो समाज में व विश्व में सत्य - अहिंसा, सुख - शान्ति व राम राज्य जैसे विकल्प प्रस्तुत करवा सकें।
सुखद और उज्ज्वल भविष्य का निर्माण कर सकने योग्य अध्यात्म को प्रतिष्ठित करने के लिए यह आवश्यक है कि चरित्रवान सुधारक वर्ग समाज के सामने आयें जो निहित स्वार्थों वाले धन, पद और सम्मान बटोरने में व्यस्त व्यक्तियों से लोगों को व समाज को भ्रम - जाल में फंसने से बचा सके । ऐसी महान प्रतिभा के धनी व विचारशील महा पुरुषों का कर्तव्य है कि वे आगे आकर निर्भीक होकर लोक - मानस में ऐसी प्रखर प्रज्ञा व चेतना का जागरण करें, जो उच्च धर्म व उत्कृष्ट राजनीति का वास्तविक स्वरूप पहचानने में समाज व विश्व को समुचित बुद्धिमत्ता का परिचय दे सके।
जय श्री राम, जय हिंद, जय भारत।
विद्यावाचस्पति डॉ कर्नल
आदिशंकर मिश्र ‘आदित्य’
लखनऊ
आध्यात्मिक एवं वैचारिक क्रांति की आवश्यकता
आध्यात्मिक एवं वैचारिक क्रांति की आवश्यकता
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