कलम संगिनी

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पतंग

HARNARAYAN KURREY

HARNARAYAN KURREY

1 Followers 93 Posts Oct 2025

पतंग

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पतंग
शिर्षक: पतंग आसमन म उड़थे रंग-बिरंगी पतंग, मन ल घलो उड़ाथे, कर देथे उमंग। डोर म बंधे सपने, हावा संग लड़े, हर झोंका म हिम्मत, नइ कभू हारे। छत म खड़े लइका, आंखी म चमक, हंसी-ठिठोली संग गूंजे हर दमक। कटे त गिर जाथे, फेर उठे उड़ाय, जीवन जइसने हरे, हार म घलो सिखाय। सूरज के किरन संग खेले पतंग, माटी ले जुड़के, छुए आसमान रंग। डोर कस मजबूत रख, मन कस उड़ान, तभे त बनही जिनगी, सुंदर पहिचान। हावा क रुख समझ, पतंग ल नचाय, सब्बो झोंका संग अपन चाल सिखाय। जिनगी म घलो एइसने खेल होथे, समय के संग चलना, सबले बड़े मोथे। कभू ऊँच उड़ही, कभू नीचे आवे, फेर घलो हिम्मत अपन डोर कस थामे। पतंग सिखाथे — नइ छोड़ भरोसा, संघर्ष म घलो चमके, उम्मीद के रंग । रचनाकार कौशल 14.01.2026

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