कलम संगिनी

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कृष्ण प्रेम

neetunagar8817

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1 Followers 27 Posts Aug 2025

कृष्ण प्रेम

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स्वरचित कविता -"प्रेम रंग मोहे दीनो" लेखिका/कवि- नीतू नागर (अम्बर) नरसिंहगढ़ मध्यप्रदेश "कृष्ण प्रेम मोहे ऐसो मिलयो जैसे प्रेम मिलों हो अंग से। हर रंग में अब कान्हा बसा हे हर गलियों में अब रास राचत हे। कोई सीखें तो सीखें बचपन कृष्ण से, वो ग्वालों संग नटखट पन किया। कोई सीखें तो सीखें कान्हा से घमंड कंस का चुर किया। और फिर एक समय में प्रेम उच्च स्तर पर रगां गया। कृष्ण प्रेम मोहे ऐसो मिलयो.... कर्तव्य निभाने चला था कान्हा वह भी प्रेम को अभिव्यक्त किया कान्हा का प्रेम हे अमृत पीकर बस खो जाऊं री। हर जनम मोहे कृष्ण प्रेम दीनो यही शब्द दोहराऊ री। माता प्रेम यशोदा मां से श्रृंगार रस में शहद मिली। युगे युगे हर रूप में कान्हा विकट रूप विकराल मिलें। कृष्ण प्रेम मोहे ऐसो मिलयो जैसे प्रेम मिलों हो अंग से । ___धन्यवाद लेखिका कवि-नीतू धाकड़ अम्बर नरसिंहगढ़ मध्यप्रदेश

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