कलम संगिनी

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माँ सरस्वती स्तुति

माँ सरस्वती स्तुति

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माँ सरस्वती स्तुति
(श्लोक 1) “वाग्देव्यै नमो नित्यं शुक्लवर्णा सरस्वति। ज्ञानदायिनि मे मातः पावय स्वं कृतं मनः॥” हे वाणी की देवी! श्वेतवर्णा माँ सरस्वती! आपको मेरा सदा प्रणाम है। हे ज्ञानदायिनी माता, मेरे मन को पवित्र और निर्मल बना दीजिए। (श्लोक 2) “वीणापाणि वराभीष्टा पद्मासना जगन्मयी। भक्तानां हृदि सा नित्यं प्रकाशं ददतु प्रभो॥” वीणा धारण करने वाली, वरदान देने वाली, कमल पर विराजमान जगन्माता! आप भक्तों के हृदय में सदा ज्ञान का प्रकाश फैलाइए। (श्लोक 3) “अज्ञानतमसां नाशे प्रकाशं यत्प्रदायिनी। सा मां पातु सदा देवी सर्वविद्याप्रसूतिका॥” अज्ञान रूपी अंधकार का नाश करने वाली, ज्ञान का उजाला देने वाली देवी! सर्व विद्या की जननी आप मुझे सदा रक्षा प्रदान करें। (श्लोक 4) “वाणीं सुधां च मे देहि बुद्धिं शुद्धां च शोभिनीम्। काव्यगीतप्रबन्धेषु प्रेरयस्व सदा मम॥” हे माता! मुझे अमृतमयी वाणी और शुद्ध बुद्धि प्रदान कीजिए। कविता, गीत और रचनाओं में सदा मुझे प्रेरणा देती रहिए।

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