शिर्षक - मकर संक्रांति
आज मकर संक्रांति के पावन दिन ला,
सूरुज देवता Capricorn मा आथे, दिल ला छूथे।
खेत-खार मा फसल लहराथे, आँखी मा आँसू खुशी के,
गाँव-गली मा बचपन के यादें जगाथे जी।
तिल-गुड़ के लड्डू बनाथें माँ के हाथ,
पतंग उड़ाथें, सपना संग उड़थें दिल के बात।
संगी-साथी संग मिलके गाथें पुराना गीत,
नदी-ताल मा स्नान करथें, पाप धोथें प्रीत।
पुरखा के कहानी सुनके भावुक होथें हम,
दान-धर्म से जीवन के दुख हरथे, बनथे सुखम।
बच्चा-बुजुर्ग सब झूमथें, आँखी मा चमक,
छत्तीसगढ़ी रंग मा डूबथें, जीतथें हर झक।
फूल-फल के सुगंध मा महकथे परिवार के बंधन,
संक्रांति के संदेश लाथे, नवा जीवन के वरदान।
मोर छत्तीसगढ़ मा ये त्यौहार मनाथें आंसू संग हँसी,
प्रेम-भाईचारा के बीज बोथें, दिल के गहराई से।
रचनाकार
कौशल
14.01.2026
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