शिर्षक - मन के बोझा
विधा - छत्तीसगढ़ी कविता
श्रेणी- प्रेरणादायक
रचनाकार -कौशल
मन के बोझा दिन-ब-दिन बढ़थे,
सोच के जंजीर, नींद के घड़ी घटथे।
बीते बात ला मन मा रखके,
आज के उजियार घलो फीका पड़थे।
अपन गलती ला स्वीकार कर ले,
बारे-बारे आत्मा ला समझा ले।
मन के बोझा कि मिट जाए तब,
नवा राह म सपन ला सजा ले।
हे मन, काबर इतका गुनथस सबद?
मोर मइया के गोदी जइसे सुखद।
दुख-तकलीफ त आथें सबो संग,
हँसी-खुशी बाँट, बन जा बहादुर संग।
जीवन के रस्ता कठिन जरूर हे,
हिम्मत से चल, मुस्कान जरूर हे।
मन के बोझा जब उतर जाही,
सपना साकार हो जाही ।।
– कौशल
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