शिर्षक – "मन की परीक्षा"
विधा – कविता
मौलिक रचना
मन की परीक्षा सबसे कठिन होती है,
यहाँ प्रश्न मौन में, उत्तर सहन में होती है।
न कोई कक्षा, न कोई समय की सीमा,
हर क्षण खुद से ही होती है प्रतिमा।
कभी आशा पास हो जाती है पूरे अंक संग,
कभी मोह फेल कर देता है जीवन के रंग।
धैर्य यहाँ सबसे बड़ा अध्यापक बनता,
विवेक की कलम से भाग्य लिखता।
हार में भी जो हिम्मत न छोड़े,
वही मन हर संकट से रिश्ता तोड़े।
जो स्वयं पर विश्वास का दीप जलाए,
वह मन की परीक्षा सदा उत्तीर्ण पाए।
रचनाकार
"कौशल"
08.01.2026
मन की परीक्षा
मन की परीक्षा
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