शिर्षक : कल्पनाओं का संसार
कविता
स्वरचित
कल्पनाओं के पंख लगाकर, मन चुपचाप उड़ जाता है,
नीले नभ की गोद में जाकर, सपना नया सजाता है।
जहाँ न सीमा, न कोई बंधन, न डर का हो विस्तार,
वहीं बसता है मन मेरा, कल्पनाओं का संसार।
रंग-बिरंगे फूल खिलें हैं, सोचों के हर द्वार,
शब्द स्वयं बन जाते गीत, भाव रचें उपहार।
टूटे सच के बोझ तले, जब मन होता लाचार,
तब आशा की लौ जलाता, यह सुंदर संसार।
यहाँ असंभव संभव बनता, टूटे दुख के जाल,
मौन पीड़ा मुस्कान बने, बदल जाए हर हाल।
जीवन की थकी राहों पर, दे जाता है उपहार,
जीने की नई राह दिखाए, कल्पनाओं का संसार।
रचनाकार
कौशल
20.01.2026
कल्पनाओं का संसार
कल्पनाओं का संसार
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