°"खुद की खोज "°
परिष्कृत हो तेरा जीवन,
खुद को खोज उजाले में।
बाहरी रूप भौतिक मन का अब,
तु खुद को देख अंतर्मन में।
विचार तेरी पहचान बनें,
तु खुद को देख व्यवहारों में।
चल कदम उठा नेकी के लिए
तु खुद देख मनावता में।
परिष्कृत हो तेरा जीवन, खुद को खोज उजाले में........!!?
मंतव्य तेरा यह खोज रहे,
तु खुद को पा अपने मन में।
उठ चेतना के हर स्तर में,
खुद को ले जा शुन्य तल में।
नियत तेरी हो शुद्ध आचरण,
तु खुद को देख आईने में।
हे सफ़र तेरा लम्बा रास्ता,
तु खुद को खोज मीलों में।
अपने रजत मन दर्पण से,
तु खुद को खोज उजाले में..!
लेखिका:- नीतू नागर
UPSC aspirants/mentor
Health consultant/women
Empowerment insitive leader
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