🌞 *भावों की सविता* 🌞
(स्वरचित कविता)
1️⃣
हिंदी है मधुर वाणी, 🌸*श्रृंगार*-रस प्रेम जगाए,
मातृभाषा अपनाकर, 😊*हास्य*-रस मुस्काए।
2️⃣
दीन-दुखी के आँसुओं में, 😢*करुणा* का उजियारा,
अन्याय पर उठती वाणी, 🔥*रौद्र*-ज्वाला का सहारा।
3️⃣
वीरों के जयघोष में गूँजे, 🦁*वीर*-रस का अभिमान,
राजभाषा बन शौर्य भरे, 😨*भयानक* का संदेश महान।
4️⃣
कुरूपता पर उठे घृणा, 🕸*बीभत्स* स्वर मुखराए,
सत्य-सौंदर्य की राह दिखा, हर बुराई हटाए।
5️⃣
🌟*अद्भुत* रस में चमके हिंदी—ज्ञान का उजियारा,
नवचेतना के दीप जलें, जग हो आलोकित सारा।
6️⃣
🌊*शांत*-रस बहे मन में, भय का अंधकार मिटाए,
भावों की सविता बनकर, हिंदी राष्ट्रभाषा कहलाए।
✍️ योगेश गहतोड़ी "यश"
(ज्योतिषाचार्य)
मोबाईल: 9810092532
नई दिल्ली - 110059
भावों की सविता (स्वरचित कविता)
भावों की सविता (स्वरचित कविता)
Please log in to post a comment.
No comments yet
Be the first to share your thoughts about this post!