कलम संगिनी

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दीपावली के पंच पर्व

adi.s.mishra

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दीपावली के पंच पर्व

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दीपावली के पंच पर्व
दीपावली के पंच पर्व पांच दिवसीय दीपावली आज भैया दूज पर्व के साथ पूरी हो जाती है भैया दूज के साथ ही पांच पर्वों की श्रृंखला पूरी हो जाती है। प्रथम दिन होता है आरोग्य औषधि के देवता धनवंतरी जी का, जिनकी कृपा अनुकंपा से मिलता है, सच्चा सुख स्वास्थ्य सम्पत्ति का, छोटी दीपावली नरक चतुर्दशी त्यौहार है द्वितीय दिवस का, घर आंगन को स्वच्छ सुंदर बनाने सजाने संवारने का। तृतीय दिवस मुख्य पर्व दीपावली मनाई जाती है, गणपति जी माता लक्ष्मी जी के शुभागमन की प्रतिक्षा होती है, चारों ओर दीप मालाएं सज जाती हैं, घर आंगन ज्योतित प्रकाश से नृत्य करने लगता है मुस्कुराने लगता है। ऋद्धि सिद्धि के स्वामी गणेश जी ऐश्वर्य समृद्धि की प्रदाता माता लक्ष्मी जी की पूजा होती है श्रद्धा भक्ति भाव से, धनाधिपति कुबेर जी की भी पूजा होती है समर्पित भाव से, साधक तृप्त तुष्ट हो जाता है अनुदान वरदान सद्भाव से। गोवर्धन गिरिराज जी की पूजा चतुर्थ दिन का त्यौहार है, अन्नकूट छप्पन भोग का प्रसाद पाता सारा संसार है। पांचवें दिन भैया दूज का पावन त्यौहार है, भाई बहन का स्नेह प्रेम और प्यार है, बहन करती है भाई के मस्तक पर मंगल टीका रोली अक्षत चन्दन का, बहन भाई को मिष्ठान खिलाती है, मधुर भाव भरे व्यवहार की सदा कामना करती है। जुग जुग जिये वीरन मेरा यही है मंगल कामना, जहां की सारी खुशियां मिल जाए मेरे भैया को बहना की यही है शुभकामना, भाई भी संकल्पित होता है बहन के आजीवन संरक्षण का, व्रत लेता है बहन से आजीवन प्रेम निभाने का। कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी धनतेरस से प्रारम्भ होता है यह पंच दिवसीय त्यौहार, कार्तिक शुक्ल द्वितीया भैया दूज को पूर्ण होता है यह मंगलमय सुंदर त्यौहार। सुभद्रा द्विवेदी लखनऊ

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