कलम संगिनी

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ख़ामोशी

HARNARAYAN KURREY

HARNARAYAN KURREY

1 Followers 98 Posts Oct 2025

ख़ामोशी

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ख़ामोशी
शिर्षक - ख़ामोशी कविता मौलिक रचना ख़ामोशी की गोद में दफ़न हैं वो बिखरे हुए अरमानों की राख, आंसुओं की लहरों में डूबती, एक मुरझाया फूल सी। हवाओं में काँपती है वो अनसुनी सिसकी, सीने की अंधेरी कोठरी में बंद, बिना किसी चीख के। ख़ामोशी फूटकर रोती है जब, पूरी ज़मीन काँप उठती है, और रूह को लगता है वो घाव, जो हर सांस में दहकता रहता है। रचनाकार कौशल छत्तीसगढ़ 29.01.2026

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