कलम संगिनी

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खुशबू : कैद, कहाँ, कभी, दीवारों में होती है 😊

Pratap Narayan Dash

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0 Followers 3 Posts Sep 2025

खुशबू : कैद, कहाँ, कभी, दीवारों में होती है 😊

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खुशबू :  कैद, कहाँ, कभी, दीवारों में होती है 😊
खुशबू : कैद, कहां, कभी, दीवारों में होती है । गर्दिश कहां किसी कश्ती की,किनारो में होती है।। मौज : समंदर ने किए लहरों से जी भरकर। कमबख्त गिनती अब दरिया की गुनाहगारों में होती है। रह गए किसान के सब खेत गिरवी, ऐ दोस्त ! कि बारिशें इस जमाने में,अब फुहारों में होती है।। क्या खूब थी राधे की, वो मोहन से लगन । ये प्यार,ये इश्क,ये मोहब्बत, सब अदाकारों में होती है।। खता भी न थी गुनाह जिसमें, सजा कबूल किया हमने। हश्र अपना जयचंद सोचें, चर्चे जिनके ईमानदारो में होती है ।।

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