कलम संगिनी

कलम संगिनी

नई सोच

HARNARAYAN KURREY

HARNARAYAN KURREY

1 Followers 98 Posts Oct 2025

नई सोच

34 Views
0 Likes 0 Comments
1 Saves
0 Shares
नई सोच जो था वही दोहराना, अब मंज़ूर नहीं मुझे, प्रश्नों की लौ जलाकर, राह बनानी है तुझे। डर की दीवार तोड़कर, सच से करना है संवाद, नई सोच के कंधों पर, टिके भविष्य के आधार।

Comments (0)

Click to view
Footer