कलम संगिनी

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कोई अपना

HARNARAYAN KURREY

HARNARAYAN KURREY

1 Followers 98 Posts Oct 2025

कोई अपना

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कोई अपना
शिर्षक – कोई अपना कविता मौलिक रचना भीड़ में खो जाऊँ तो नाम मेरा पुकारे कोई अपना, सूनी रातों में आँसू पोंछे, चुपचाप—कोई अपना। टूटे हौसलों की राख से सपने जगा दे कोई अपना, बिन पूछे दर्द समझ ले, बस पास रहे—कोई अपना। जब सारी दुनिया मतलब में मुँह मोड़ ले, कोई अपना, मेरी खामोशी को भी दुआ-सा तोल ले—कोई अपना। गिर जाऊँ तो उठने का साहस बन जाए कोई अपना, मेरी हर हार को जीत में बदल दे—कोई अपना। साँसें जब बोझ बनें, तब सुकून बन आए कोई अपना, जीवन की ठंडी राहों में आग बन जाए—कोई अपना। सब कुछ छिन जाए, फिर भी जो रह जाए—कोई अपना, वही तो होता है सच में, भगवान-सा—कोई अपना। रचनाकार कौशल छत्तीसगढ़ 30.01.2024

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