भारतीय स्वतंत्रता क्रांति और हिन्दी
स्वतंत्रता आंदोलन में मातृभाषा
हिन्दी ने क्रांतिकारियों में जज्बा
भरने का अद्भुत कार्य किया था,
हिंदी ने जोशीला साथ दिया था।
स्वतंत्रता के बाद देश में जोश और
उत्साह की अति आवश्यकता थी,
हिन्दी भाषा के अनेकों नारों ने ही
आज़ाद देश को विकासगति दी।
कर मत दो - सरदार पटेल का,
जयजगत-आचार्य विनोबा भावे
जय जवान, जय किसान - लाल
बहादुर शास्त्री जी का नारा था।
मारो फिरंगी को-मंगल पांडे का,
संपूर्ण क्रांति:जयप्रकाश नारायण,
विजयी विश्व तिरंगा प्यारा-श्याम
लाल गुप्ता पार्षद जी का गाना था।
स्वराज्य हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है,
बालगंगाधर तिलक ने ललकारा था,
‘सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल
में है’रामप्रसाद बिस्मिल ने गाया था।
‘सारे जहां से अच्छा हिंदोस्तां हमारा’
अल्लामा इकबाल ने और आदित्य
‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी
दूंगा’ सुभाषचंद्र बोस ने पुकारा था।
डॉ कर्नल आदि शंकर मिश्र
‘आदित्य’, ‘विद्यावाचस्पति’
लखनऊ
भारत की स्वतंत्रता क्रांति और हिन्दी
भारत की स्वतंत्रता क्रांति और हिन्दी
Please log in to post a comment.
No comments yet
Be the first to share your thoughts about this post!