एक दिन के लिए,चाय
कविता
मौलिक रचना
सुबह की पहली किरण में,
चाय की महक तेरी मुस्कान सी, दिल की गहराइयों में उतरती है आंसू बनकर।
एक दिन के लिए चाय ये साथी, टूटे प्रेम की तरह वफादार, छिपाए राज़ अनगिनत।
मीठी यादों में डूबकर, कड़वी जुदाई की आग में जलती हुई सांसें।
गर्माहट से पिघलता है जमे दर्द का ठंडा दिल, तेरी बाहों की छाया में।
शांति की हर घूंट में बसी है अनकही मोहब्बत की पीड़ा, जो जीवंत हो उठती है हर बार।
रचनाकार
कौशल
छत्तीसगढ़
28.01.2026
एक दिन के लिए चाय
एक दिन के लिए चाय
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