कलम संगिनी

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एक दिन के लिए मां पिता

HARNARAYAN KURREY

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एक दिन के लिए मां पिता

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एक दिन के लिए मां पिता
एक दिन के लिए माँ-पिता कविता मौलिक रचना एक दिन के लिए लौट आईं माँ-पिता की छाया, गले लगकर बह निकले आंसुओं के सैलाब। माँ की गोद में डूबा दिल, पिता की मुस्कान जगी, वो पुरानी लोरियाँ गूँजीं, रूह तक कंपकंपी। पर रात ढली, फिर वही तन्हाई ने घेर लिया, एक दिन के लिए ही सही, वो अपनापन अमर हो गया। रचनाकार कौशल छत्तीसगढ़ 28.01.2026

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