नीति युक्त पंक्तियां
मुखिया मुख सो चाहिए
खान पान कहूँ एक,
पालइ पोशइ सकल अंग
तुलसी सहित विवेक।
प्रेम विराजे हृदय में
संसाधन ना होय,
प्रेम की गागर भरी रहे
रिक्त कभी ना होय।
प्रेम बेल बड़ी मृदुल है
देखन में सुकुमार,
स्नेह जल से सिंचिये
कभी नहीं मुरझाए।
इक माला के मोती हैं
घर के सभी सदस्य,
मोती कभी बिखरे नहीं
करें यही कर्तव्य।
परिवार शब्द अनमोल है
लगे नहीं कुछ मोल,
जो कोइ इसको समझ ले
जीवन हो अनमोल।
इस दुनिया में रहना है
जीवन के दिन चार,
हिल मिल कर सबसे रहें
करें प्रेम व्यवहार।
हरि भजन सुमिरन करें
कर लें जप और ध्यान।
थोड़े में ही रीझते
कृपा सिंधु भगवान।
स्वस्थ समुन्नत रहें सभी
सबका हो कल्याण,
सद्विवेक सद्ज्ञान मिले
प्रभु की कृपा महान।
राम नाम की नाव
कृष्ण नाम पतवार,
सदगुरु खेवनहार हैं
कर देंगे भव पार।
सब तीर्थ से बड़ा है,
तीर्थ राज प्रयाग,
रोम रोम से करें सदा
कण कण को प्रणाम।
कवियित्री सुभद्रा द्विवेदी, ‘विद्यावाचस्पति’,
लखनऊ
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