कलम संगिनी

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घोर कलियुग है भाई

adi.s.mishra

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घोर कलियुग है भाई

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घोर कलियुग है भाई
घोर कलियुग है भाई स्थानीय समाचार पत्रों का समाचार मन को कितना विचलित कर देता है, ऐसा लगता है, घोर कलियुग है, भाई भाई, मित्र मित्र की हत्या कर देता है। किसको दोष दिया जाय, उस बालक को, जो हत्यारा बन कर कारागार में जायेगा, या समाज को जहाँ ऐसा वातावरण बना, प्रश्न जटिल है, क्या समाधान हो पाएगा। आख़िर ऐसा क्या हो रहा है, इस देश और इस दुनिया में, भाई भाई का दुश्मन बन कर, कुढ़ता है ईर्ष्या की अग्नी में। नेता नेता का दुश्मन बनकर, नेता को ही धूल चटाता है, कोई गुंडा गुंडा बन करके, एक गुंडे को मार गिराता है। सामाजिक वैमनस्य की पराकाष्ठा, हुआ पराभव मानवता की निष्ठा का, गौतम, गांधी जी का देश भारत था, हुआ अभाव, उनके पवित्र आदर्शों का। फ़िल्में, टीवी सीरियल दिखलाते हैं, दिन रात हिंसा व्यभिचार के नाटक, आदित्य कर दिए गए बन्द भारत में, सत्य, अहिंसा और शांति के फाटक। क्या कोई गौतम फिर से पैदा होगा, गांधी कोई फिर से भारत में आयेगा, राम, कृष्ण की इस पावन धरती में, आदित्य फिर कोई अधर्म मिटायेगा। डा. कर्नल आदि शंकर मिश्र ‘आदित्य’, ‘विद्या वाचस्पति’ लखनऊ

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