कलम संगिनी

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पांखी

HARNARAYAN KURREY

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पांखी

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पांखी
"पांखी" कविता पांखी उड़ गिस, सपना ला पंख लगाय, नील गगन म आज़ादी के गीत सुनाय। डार-डार घूमे, डर ला दूर भगाय, मन के आकाश म उम्मीद बरस जाय।

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