कलम संगिनी

कलम संगिनी

देवदत्त उपप्राण (स्वरचित कविता)

देवदत्त उपप्राण (स्वरचित कविता)

45 Views
0 Likes 0 Comments
0 Saves
0 Shares
देवदत्त उपप्राण  (स्वरचित कविता)
देवदत्त उपप्राण (स्वरचित कविता) 👇1👇 साँझ ढले जब हवा थमे, नभ में तारे झिलमिलाएँ, देवदत्त उपप्राण सखा बन, निद्रा की गोदी तक लाए। तन-मन को देता संतुलन, हर पल शांति बरसाता, प्राण-प्रवाह मधुर बनकर, जीवन को सुख से सजाता। 👇2👇 जंभाई लेकर मन जगाए, नींद का संदेश सुनाए, साँसों के प्रवाह को थामे, तन-मन को विश्राम दिलाए। शारीरिक संतुलन भरता, यही इसकी पहचान, देवदत्त उपप्राण सदा ही, जीवन का दर्पण महान। 👇3👇 नींद-जागरण का क्रम सदा, इसके ही अधीन बँध जाता, विश्रांति का मधुर संदेश, हर क्षण इसमें बह जाता। प्राण-चेतना का संगम, तन-मन में ऊर्जा भरता, देवदत्त की सरल लय से, जीवन सुंदर निखरता। 👇4👇 वैदिक दृष्टि बतलाती है, स्थिर सुख-शांति का रूप, देवदत्त उपप्राण सदा दे, जीवन को नव स्वरूप। आत्म-जागरण का दीपक बन, चेतन धारा छू जाता, देवदत्त का मधुर स्पंदन, सुख-गीत सदा गुँजाता। 👇5👇 सूक्ष्म प्रवाह शरीर में, इसका स्थान अनोखा है, हर स्पंदन में छुपा हुआ, जीवन का सत्य गहन है। जंभाई से निद्रा तक, सहजता से साथ निभाता, देवदत्त उपप्राण सदा ही, प्राण-जगत सँभाल जाता। 👇6👇 रात्रि के गंभीर समय में, यह सजग बना रहता है, धीरे-धीरे मानव को, गहरी निद्रा में ले जाता है। मन को शांति, तन को सुख, हर अंग में विश्राम भरता, जीवन की धारा सँभाल, स्थिरता का संदेश करता। 👇7👇 हर जंभाई में झलक रहा, चेतना का गूढ़ रहस्य, देवदत्त उपप्राण सदा ही, लाता जीवन में उत्कर्ष। संतुलन और शांति समेटे, सरलता से खिल जाता, भीतर की सुप्त शक्ति को, पल-पल जाग्रत करता। 👇8👇 वैदिक वाङ्मय कहता है, यह संतुलन का है गीत, उपनिषदों का सन्देश है, प्राण और ज्ञान का संगीत। आत्मा से गहरा जोड़े जो, जीवन पथ को सरल बनाता, देवदत्त उपप्राण सदा ही, सुख का दीपक जलाता। 👇9👇 निद्रा का उचित समय वही, जंभाई से इंगित करता, प्राण-चेतना से तन-मन, ऊर्जा से परिपूर्ण भरता। विश्रांति का मधुर संदेश, सहज ही सब तक पहुँचाता, देवदत्त उपप्राण निरंतर, जीवन को मधुर बनाता। 👇10👇 हर प्राणी के भीतर इसका, प्रवाह सदा बहता है, संतुलन और शांति बुनकर, जीवन को सुंदर करता है। विश्रांति और नवीकरण का, यह अद्भुत संदेशा देता, देवदत्त उपप्राण सदा ही, जीवन सुधा बहा देता। ✍️ योगेश गहतोड़ी "यश" (ज्योतिषाचार्य) मोबाईल: 9810092532 नई दिल्ली -110059

Comments (0)

Click to view
Footer