कलम संगिनी

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कविता - वीरों का शौर्य

reenapatle2007

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0 Followers 2 Posts Jul 2026

कविता - वीरों का शौर्य

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विषय-"वीरों का शौर्य" वीरों का शौर्य दीप बने, हर युग का अभिनंदन है, उनके साहस से महक रहा, भारत का उपवन है। जब भी नभ पर छाए बादल, तुम सूरज बन जाते हो, अँधियारे के हर कोने में, नव विश्वास जगाते हो। तुमसे ही सीमा मुस्काती, तुमसे ही सम्मान है, भारत माँ के पावन माथे का तुम ही तो अभिमान हो॥ स्वार्थ नहीं, बस राष्ट्र प्रथम का, मंत्र हृदय में बसता है, कठिन समय की हर चुनौती, वीर सदा हल करता है। त्याग तुम्हारा अमृत बनकर, पीढ़ी-पीढ़ी बहता है, तुमसे ही तो हर भारतवासी, गर्व से सिर उठाता है॥ आओ ऐसा दीप जलाएँ, जो साहस का संदेश बने, हर बच्चे के कोमल मन में, वीरों जैसा वेश बने। मेहनत, सेवा, प्रेम और निष्ठा, जीवन का आधार बने, भारत का हर नवयुवक फिर, वीरों का अवतार बने॥ जब तक गंगा की धारा है,सदा हिम का मान रहेगा, वीरों का यह अमर पराक्रम, हर दिल में सम्मान रहेगा। जय भारत के वीर सपूतों, जय-जय मातृभूमि महान, तुमसे ही गौरवशाली है, अपना प्यारा हिंदुस्तान। रीना पटले शिक्षिका शासकीय हाई स्कूल ऐरमा कुरई जिला सिवनी मध्यप्रदेश

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