कलम संगिनी

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आदित्यायन साहित्य दर्पण: अक्षय नवमी-आँवला नवमी

adi.s.mishra

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आदित्यायन साहित्य दर्पण: अक्षय नवमी-आँवला नवमी

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आदित्यायन साहित्य दर्पण: अक्षय नवमी-आँवला नवमी
अक्षय/ आँवला नवमी कण-कण में है झांकी भगवान की, किसी सूझ वाली आंख ने पहचान ली, भारतीय संस्कृति है देव संस्कृति, कण कण में देवत्व का दर्शन कराने वाली संस्कृति। वृक्ष वनस्पति नदी पहाड़ सब में दर्शन, मिलता है ईश्वरीय प्रतिबिंब का, सबका निर्धारित है एक विशेष दिन, पूजन अर्चन वंदन विधि विधान सम्मान का, कार्तिक शुक्ल नवमी का, विशेष दिन आँवला नवमी, अक्षय नवमी का। आँवला वृक्ष बहुत ही पवित्र शुद्ध सात्विक ऊर्जा देता है, पत्ते पत्ते से दिव्य सात्विकता का स्रोत निकलता है, वैज्ञानिक शोध है यह शक्ति ऊर्जा, कार्तिक शुक्ल नवमी को सर्वाधिक निकलती है। यह प्राण दायिनी शक्ति दायिनी आरोग्य दायिनी होती है, भारतीय धर्म ग्रन्थ एवं ऋषि मुनि भी इसकी पुष्टि करते हैं, इसी कारण कार्तिक शुक्ल नवमी को आँवला वृक्ष का पूजन अर्चन वंदन करते हैं, आंवला वृक्ष की छत्र छाया में बैठ कर भोजन भी करते हैं। धूप दीप अक्षत सिंदूर पुष्प नैवेद्य पान सुपारी दक्षिणा अर्पित की जाती है, नौ बार कच्चा सूत लपेटते हुए परिक्रमा की जाती है। मनोकामना पूर्ण होती है मिलता है सुख स्वास्थ्य सौभाग्य संवर्द्धन, निर्मल होता है सात्विक तन मन धन अंतर्मन। शुद्ध पवित्र होता है बुद्धि विवेक विचार, मिलता है दिव्य अलौकिक ईश्वरीय शक्ति भक्ति का सुख सार। सुभद्रा द्विवेदी, लखनऊ

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