शीर्षक: "युवाओं का राष्ट्र"
कविता
मौलिक रचना
युवाओं के कंधों पर सपनों का भार है,
इनकी आँखों में ही भारत का आधार है।
जोश से भरे कदम, सोच में उजास,
यही तो हैं राष्ट्र के सच्चे विश्वास।
कलम, कुदाल या कंप्यूटर हाथ में,
हर क्षेत्र में दिखते हैं ये साथ में।
संघर्ष से डरना इन्हें आता नहीं,
हार के आगे ये झुक पाते नहीं।
नव विचारों से सजता हर प्रहर,
युवा ही रचते हैं नया सफ़र।
जब जागे युवा, जागे हर प्रांत,
तभी बनेगा सशक्त — युवाओं का राष्ट्र।
रचनाकार
"कौशल"
14.01.2026
युवाओं का राष्ट्र
युवाओं का राष्ट्र
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