*आज 51वीं सालगिरह पर – ज़िन्दगी से सीखी 51 बातें*
1. जीवन बहुमूल्य है।
2. मुस्कान अनमोल है।
3. आत्मसंतुष्टि ही असली उपलब्धि है।
4. खुद से प्रेम करना ज़रूरी है।
5. मदद के कदम मायने रखते है।
6. आलोचना कमज़ोरी नहीं, आईना है।
7. आभार सबसे सुंदर अभिव्यक्ति है।
8. जरुरी है बात करना ।
9. इच्छाएँ अनंत हैं, ज़रूरतें सीमित रखें।
10. प्रकृति हर व्यवहार का उत्तर देती है।
11. आत्मविश्वास बड़ा सहारा है।
12. खुशियाँ सहेजनी होती है ।
13. ईश्वर सब देख रहा है।
14. सपनों की कोई उम्र नहीं होती।
15. बड़ों का आशीर्वाद अमूल्य है।
16. चुप रहना भी बुद्धिमानी है।
17. निंदक नेरे रखो, सुधार का साधन है।
18. हर किसी की यात्रा अलग है।
19. रंग ज़िंदगी के जश्न हैं।
20. असफलता अंत नहीं, शुरुआत है।
21. हर पल को महसूस करो।
22. अपने हिस्से की ईमानदारी निभाओ।
23. प्रेम देना ही प्रेम पाना है।
24. हर सुबह एक नई शुरुआत है।
25. आत्मा पर झुर्रियाँ नहीं पड़तीं।
26. खुशी बाँटने से बढ़ती है।
27. डर के आगे जीत है।
28. समय सब सिखा देता है।
29. संघर्ष जीवंत होने की निशानी है।
30. स्वास्थ्य सबसे बड़ा धन है।
31. शरीर सबसे वफादार साथी है।
32. अपने निरनय पर शक मत करों।
33. हर कोई अपनी लड़ाई लड़ रहा है।
34. खुद पर भरोसा रखो।
35. उद्देश्यपूर्ण कर्म पहचान बनाते हैं।
36. घर को प्यार से सजाओ।
37. छोटी जीतों का जश्न मनाओ।
38. किताबें सच्ची सहेलियाँ हैं।
39. बड़ों की बातों में अनुभव छिपा है।
40. उदासी में बचपन याद करो।
41. कुछ न करना भी आत्म-देखभाल है।
42. दुश्मन को समझो, नफ़रत घटेगी।
43. विश्वास सबसे गहरी प्रार्थना है।
44. बच्चो का प्यार सम्मान निधि है।
45. सुंदरता नज़रों में है चेहरों में नहीं।
46. अपनी पहचान और गर्व बनाये रखो।
47. उम्मीद का दीप जलाए रखो।
48. “ना” कहना आत्म-सम्मान है।
49. अपनाना आसान, बदलना कठिन।
50. सब कुछ अपने समय पर होता है।
51. दुनिया छोटी और गोल है।
आगे के लिए .....
ज़िन्दगी बेहद खूबसूरत है और सफ़र अभी बाकी है…
डॉ रंजना द्विवेदी, लखनऊ
डॉ रंजना द्विवेदी, 51 वीं साल गिरह
डॉ रंजना द्विवेदी, 51 वीं साल गिरह
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