गोस्वामी तुलसीदास जी
कालजई संत प्रवर पूज्य गोस्वामी तुलसीदास जी।
कालजई महाकाव्य श्री रामचरित मानस के प्रणेता गोस्वामी तुलसीदास जी।।
गोस्वामी जी का जन्म दिवस श्रावण शुक्ला सप्तमी।
महाप्रयाण दिवस श्रावण शुक्ल सप्तमी।।
श्री रामचरित मानस नहीं है
केवल धार्मिक ग्रंथ।
जीवन जीने की कला सिखाता है यह महाग्रंथ।।
व्यक्ति परिवार समाज को सही दिशा दिखाता है यह महाकाव्य।
चरित्र निर्माण की प्रक्रिया सिखाता है यह महाकाव्य ।।
गोस्वामी जी ने भगवान श्री राम को घर घर पहुंचा दिया।
श्री मानस की पंक्तियों से जन जन को आत्म विभोर कर दिया।।
विश्व भर में श्री राम कथा गाई जाने लगी।
प्रत्येक व्यक्ति के मुख से रामायण की चौपाई मुखरित होने लगी।।
गोस्वामी जी ने विनय पत्रिका,कवितावली, दोहावली आदि कई रचनाओं को भक्ति रस से सजाया है।
परन्तु उनके महाकाव्य श्री रामचरित मानस ने उन्हें विश्व कवि बना दिया।
विश्व मानक कीर्तिमान स्थापित कर दिया।।
धन्य हैं पिता श्री आत्माराम जी।
धन्य हैं माता हुलसी जी।
उनके चरणों में बारम्बार प्रणाम है।
धन्य हैं देवी रत्नावली
उन्हें भी प्रणाम है
जिनकी प्रेरणा ने सामान्य व्यक्ति को श्री राम भक्त और महासंत बना दिया।
कवि शिरोमणि गोस्वामी तुलसीदास बना दिया।।
ज्ञान कर्म और भक्ति का बोध कराता कौन मानव जीवन का मर्म बताता कौन
भक्ति के आनन्द सागर में डुबोता कौन।
भव सागर से पार लगाता कौन जो पै यह रामायण तुलसी न गावतो।।
ऐसे महाकवि बाबा तुलसीदास जी के श्री चरणों में नमन वंदन अभिनंदन है नमन वंदन अभिनंदन है।।
कवियित्री सुभद्रा द्विवेदी, ‘विद्यावाचस्पति’, लखनऊ
महाकवि गोस्वामी तुलसीदास
महाकवि गोस्वामी तुलसीदास
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