कलम संगिनी

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छल

HARNARAYAN KURREY

HARNARAYAN KURREY

1 Followers 99 Posts Oct 2025

छल

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छल
छल मौलिक रचना कविता मत देखो चेहरे की चमक, हर चेहरा सच्चा नहीं होता, हर मुस्कान के पीछे छिपा, दिल का किस्सा नहीं होता। मीठी बातों के दरिया में, विष भी बहता रहता है, छल का नाग समय पाकर, चुपके डसता रहता है। अपने बनकर आने वाले, अक्सर दर्द दे जाते हैं, विश्वासों की सुंदर नगरी, पल में राख बना जाते हैं। आँखों में सपनों का दीपक, जो आकर जलाते हैं, वही स्वार्थ की आँधी बनकर, हर उम्मीद बुझाते हैं। लेकिन याद रखो दुनिया में, सच कभी हारा न करता, झूठ के ऊँचे महलों में, उजियारा ठहरा न करता। क्षण भर की चमक लिए छल, बहुत शोर मचाता है, सत्य सूर्य बनकर आखिर, हर अंधियारा खाता है। मत रखना मन में कपट कभी, प्रेम का दीप जलाना तुम, टूटे दिलों की सूनी राहों में, आशा फूल खिलाना तुम। कहते "कौशल" इस जग में, सत्य अमर वरदान है, छल की हर इक चाल हारी, सच्चाई पहचान है।। कौशल मुड़पार चु पोस्ट रसौटा तहसील पामगढ़ जिला जांजगीर चांपा छत्तीसगढ़

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