शिर्षक जांगर
छत्तीसगढ़ी कविता
स्वरचित
जांगर मोर छत्तीसगढ़ के, दिल के गहराई ले भरा।
खेत खार मा पसीना बहत, आंसू जइसे गिरा।
सूरज निकलत बिहनिया ले, रात के अंधियार तक।
जांगर के जोर ले, दुख ला हरत, सपना ला सजात।
धान रोपत किसान भाई, आंखी मा आस भरी।
पसीना बहावत दिन रात, हृदय के दर्द छुपा के।
बइला जोतत खेत ला, हाथ मा नागर धर के।
जांगर के दम ले, माटी के प्रेम मा जीत।
गाँव के जीवन मा, जांगर हे आंसू के सहारा।
दुख सुख मा साथ देय, दिल के जख्म ला भरत।
महिला मन घर संभारत, आंखी मा सपना पालत।
बच्चा पालत, काम करत, प्रेम के आग मा जलत।
नाच गान मा जांगर, करमा सुवा के भाव मा।
ढोल मांदर बजत, दिल के दर्द ला गात।
पर्व तिहार मा जोश, जांगर के आंसू मेल।
छत्तीसगढ़िया सब्बो, हृदय के प्रेम ले जुड़त।
जांगर हे हमर पहचान, दिल के बलवान बनात।
अपन संस्कृति ला बचावव, आंसू के मोती ले सजात।
मोर छत्तीसगढ़ महान हे, जांगर के भाव ले भरा।
सबो मिल जांगर बढ़ावव, माटी के प्रेम के खातिर गा।
रचनाकार
कौशल
20.01.2026
जांगर
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