कलम संगिनी

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मातारानी का भजन

मातारानी का भजन

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मातारानी का भजन
काव्य गीत मां जगदम्बे का भजन तर्ज -लेके पहला पहला आया नवरात्री त्योहार ,भक्ति में गूंजे संसार । शक्ति का होता संचार, मंगलमय हो हर परिवार। सज गई चौकी देखो यहां ,दीप जले हैं, हर पल मां का यहां ,प्रेम मिले हैं, होकर बैल पर सवार,शैलसुता का रूप सिंगार , धरके आई है मैया, हम सब के द्वार। माँ के चरणों में ,शीश झुकाएं हम , सुख समृद्धि ,सब कुछ पाएं हम , भक्तों को है ,मिलता प्यार , नवदुर्गा करती कल्याण , भरते जीवन में हम ,सबके सम्मान* ।। माथे पर चंद्र, शीश पर शोभाय है, मां का रूप मनोहर ,मन को भाये है, होकर सिंह पर सवार,लेकर हाथ में कटार, शेरावाली मैया आई ,हम सबके द्वार।।। माता रानी की महिमा निराली है, भक्तों पर करती कृपा मतवाली है, हाथ में लेकर पुष्प और दुलार, लेकर आई स्नेह अपार। शेरावाली माता हम सबके द्वार । वर्ण स्वर्ण तेजस्वी, करती सिंह सवारी, कात्यायन के घर पे जन्मी ,चारभुजा धारी , शक्ति, साहस,,अभय पुष्प ले हाथ , रोग ,शोक ,भय से मुक्त करती ,देती भक्तों का साथ।।।। शेरावाली मैया हम सबके द्वार।। रूप तेरा देख हर भक्त मुस्काए रे देखो आई मैया रूप धरके आई रे रूप 16 श्रृंगार मन को भाये है अपार, आई आई मैया हम सबके द्वार। आया नवरात्री त्योहार।।। मैया की दीवानी सारे भक्त यहां हो गए, देखते देखते सब माता में खो गए। भटके को राह दिखाए, जीवन आधार बनाए । विनती कर लो मैया मेरी स्वीकार ।। आया नवरात्री त्योहार।।। मैया का चोला सबको सुहाए , मैया की पायलिया मन को भाए। पहन के नर मुंडो की माल ,आई शेर पर सवार । शेरावाली मैया आई सबके द्वार। माथे पर चंद्र शीश पर शोभाय हैं , मां का रूप मनोहर मां को भाये है। आई शेर पर सवार लेकर हाथ में कटार, शेरावाली मैया आई सबके द्वार। हाथों में मेहंदी चूड़ियां सजी है , आंखों में काजल ,माथे बिंदी लगी है। आई पुष्प पर सवार लेकर हाथ में दुलार । शेरावाली मैया आई सबके द्वार।।। आया नवरात्री त्योहार,भक्ति में गूंजे संसार। शक्ति का होता संचार,मंगलमय हो घर परिवार। जय मां जगदम्बे स्वरचित गीत प्रतिभा दिनेश कर विकासखण्ड सरायपाली

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