कलम संगिनी

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मेरी धार्मिक यात्राएँ

adi.s.mishra

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मेरी धार्मिक यात्राएँ

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मेरी धार्मिक यात्राएँ
*मेरी धार्मिक यात्रा वृत्तान्त* मेरी धार्मिक यात्रायें मेरे बचपन से ही प्रारम्भ हो गई थीं। मेरे गांव में घर के सामने ही कूटी बाबा महादेव का मन्दिर, जहाँ रोज़ जल चढ़ाने जाया करता था और वहीं से मेरे मन में देवी देवताओं के लिये अगाध श्रद्धा भक्ति की भावना जागृत हो चुकी थी। गांव से कानपुर शहर पढ़ने गया तो वहाँ छोटे बड़े सैकड़ों देवी देवताओं के मंदिरों के दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त होता रहा। साथ ही प्राय: गंगा स्नान भी करने जाता रहा जो बचपन से ही प्रकृति में समा चुका था। युवा वस्था में आकर सरकारी नौकरी मिल गई और जहाँ जहाँ भी पोस्टिंग होती थी वहाँ के सभी देवी देवताओं के दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त होता रहा, श्रद्धा भक्ति भाव के साथ आस्था और विश्वास का भाव चूँकि बालपन से ही भरा था इसलिए जहाँ भी पोस्टिंग होती सबसे पहले वहाँ के प्रसिद्ध मंदिर के दर्शन अवश्य कर लेता था। इस भक्ति भावना के फल स्वरूप मुझे निम्न लिखित धर्म स्थलों में देवी देवताओं के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त होता रहा है और अभी भी यही भक्ति भाव जब तब मंदिर और गुरुद्वारों तक ले जाता है। अभी दो महीने पहले ही सारे परिवार के साथ (पत्नी, दो बेटों और उनकी पत्नियाँ तथा बच्चे, कुल नौ लोग, जिनमें छोटे बेटे सपरिवार अमेरिका से आए हुए थे) अयोध्या श्री राम जन्मभूमि मंदिर के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ। मेरी दैनिक चर्या में अपने घर के पास श्री जन कल्याणेश्वर मंदिर में दर्शन के साथ पास के अन्य कई मंदिरों में दर्शन करने और मॉर्निंग वॉक शामिल होता है। घर में मंदिर में पूजा आरती नियमित सपत्नीक करते हैं। जीवन के 77 वर्ष पूरे हो रहे हैं और पंद्रह वर्ष की आयु में यज्ञोपवीत के बाद से मैंने सभी व्रत किए हैं। देवोत्थानी एकादशी, श्री कृष्ण जन्माष्टमी, सावन के सभी सोमवार, शिवरात्रि इत्यादि मेरी परम आस्था में शामिल हैं। इस प्रकार मेरी धार्मिक यात्रा वृत्तान्त में गंगा स्नान से लेकर क्षिप्रा नदी स्नान के साथ महाकालेश्वर, काल भैरों मंदिर, चिंतामणि गणेश मंदिर उज्जैन, कामाख्या देवी, वैष्णों देवी, अमरनाथ, बद्रीनाथ, काशी विश्वनाथ मंदिर और सभी प्रमुख धर्मस्थल वाराणसी, कोलकाता माँ काली मंदिर, प्रयागराज कुंभ संगम स्नान और वहाँ के सभी धर्म स्थल, शारदा देवी मंदिर मैहर, श्री राम जन्मभूमि मंदिर अयोध्या, संकट मोचन हनुमान मंदिर कैलिफोर्निया, अमेरिका प्रवास के दौरान, फ़्रीमोंट हिंदू टेम्पल, दुख निवारण गुरुद्वारा सैन जोश, कैलिफोर्निया, (अमेरिका) दुख निवारण गुरुद्वारा पटियाला, चंद्रिका देवी मन्दिर, बक्सर उन्नाव, संकठा देवी मंदिर गेगासों, रायबरेली, जे के मंदिर कानपुर और ब्रह्मावर्त मंदिर बिठूर, कानपुर देहात, मनकामेश्वर मंदिर लखनऊ, संकटमोचन हनुमान मंदिर लखनऊ, इस्कान मन्दिर लखनऊ, शंकराचार्य मंदिर श्रीनगर, नैना देवी मंदिर और शाकंभरी देवी मंदिर, उत्तराखंड, मनसा देवी मंदिर और हर की पैड़ी हरिद्वार, ऋषिकेश धाम के सभी धर्म स्थल, शांतिकुंज गायत्री शक्तिपीठ हरिद्वार और सभी धर्म स्थल इत्यादि प्रमुख धर्मस्थलों के साथ ही अनेक छोटे बड़े धार्मिक स्थलों में दर्शन पूजन करने का सौभाग्य मिला। सबसे कठिन धार्मिक यात्राओं में बाबा बर्फानी अमरनाथ की यात्रा थो जिसे केवल एक बार कर सका, केदार नाथ फिर भी नहीं जा सका। माँ वैष्णों देवी के दर्शन कई बार करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। महाकालेश्वर मंदिर के समीप एक साल रहने का अवसर मिला तो बहुत बार बाबा के दर्शन हुये। वहाँ के प्रमुख पुजारी ही साथ ले जाया करते थे। यही स्थिति हरिद्वार गंगा स्नान और धर्म स्थानों में दर्शन प्राप्ति का रहा। एक एक यात्रा का वृत्तान्त यदि शब्दों में वर्णन किया जाय तो कई ग्रन्थ तैयार हो जाएँगे। इसलिये संक्षेप में इस आलेख में अपने जीवन की धार्मिक यात्रा प्रस्तुत कर रहा हूँ। प्रस्तुत है मेरी एक भक्ति रचना: भूल जाऊँ मैं, मुझे भी गवाँरा नहीं सुंदर सुहावने स्वप्न जैसे होते हैं, आते हैं, दिखते हैं, चले जाते हैं, सामने आना उनको गँवारा नहीं, भूल जाऊँ मैं, मुझे भी गवाँरा नहीं। परीक्षा ही है यह मेरे लगाव की, दर्शन दुर्लभ हैं, मेरे प्रेम भाव की, आँखें तरसती हैं, राहें तकती हैं, वो आयेंगे, प्यास बुझेगी मन की। भक्त को भगवान की प्रतीक्षा है, प्रेम में भक्त की कठिन परीक्षा है, शबरी ने प्रतीक्षा कई युगों तक की, मीरा की प्रतीक्षा तो पूरी न हो सकी। अहल्या पत्थर बनी प्रतीक्षारत रहीं, गज, गीध, अजामिल गणिका भी, मुक्ति चाह में युगों तक प्रतीक्षा में थी, आदित्य मुझे भी प्रतीक्षा उनकी थी। डॉ कर्नल आदि शंकर मिश्र ‘आदित्य’, ‘विद्यावाचस्पति’ लखनऊ:

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