कलम संगिनी

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बूढ़ा के दूख

HARNARAYAN KURREY

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1 Followers 93 Posts Oct 2025

बूढ़ा के दूख

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बूढ़ा के दूख
बूढ़ा के दूख (कविता | मौलिक रचना |) झुर्रियों में कैद कहानी, आँखों में ठहरी रात, चलते-चलते थक गए पाँव, बोझ बनी हर बात। जिसने घर को सींचा था, पसीने की हर धार, आज उसी चौखट पर बैठे, बनकर एक उपहार। बच्चों की हँसी में ढूँढे, अपना बीता कल, नाम पुकारे कोई तो, भर आता है पल-पल। दवा की शीशी गिनती है, दिन और रात के बीच, सहारे की छाया खोई, सूनी पड़ी हर नीच। सम्मान की एक नज़र, बस यही उसकी आस, बूढ़ा के दूख समझे जो, वही सच्चा पास। रचनाकार कौशल

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