उपहार - लघुकथा
एक छोटे से गाँव में राधा नाम की लड़की अपनी दादी के साथ रहती थी। राधा के पास ज्यादा धन नहीं था, लेकिन उसका दिल हमेशा दूसरों के लिए प्यार और खुशियाँ बाँटने के लिए खुला रहता था।
एक दिन गाँव में मेला लगा। सभी बच्चे मिठाई और खिलौनों की दुकानों की ओर भागे, लेकिन राधा के पास कुछ खरीदने के लिए पैसे नहीं थे। वह उदास होकर मेले में घूम रही थी, तभी उसने देखा कि एक बूढ़ी महिला अपनी झोली में टूटे खिलौने बेच रही थी।
राधा ने दादी से पूछा, “दादी, क्या आपके पास कुछ पैसे हैं?”
दादी ने अपनी जेब में देखा और एक ही सिक्का पाया। उन्होंने वह एक रुपया राधा को दे दिया।
राधा उस एक रुपया लेकर खिलौने बेचने वाली महिला के पास गई और उसने दो टूटे हुए पपेट खरीदे। घर जाकर उसने उन दोनों पपेट को नए कपड़े से सजाया और खुद अपने हाथों से ठीक किया।
अगले दिन उसने एक पपेट अपने छोटे पड़ोसी अंशु को उपहार में दे दिया। अंशु बहुत बीमार था, जैसे ही अंशु ने यह उपहार देखा तो वह बहुत खुश हो गया। अंशु की आँखों और चेहरे में चमक देखकर राधा का दिल भी बहुत खुश हुआ।
कुछ दिन बाद गाँव में “सबसे सुंदर और भावपूर्ण उपहार” प्रतियोगिता हुई। राधा ने दूसरा पपेट प्रतियोगिता में भेजा। जजों ने देखा कि यह सिर्फ खिलौना नहीं, बल्कि प्यार, मेहनत और भावना से भरा हुआ उपहार है, तो राधा को पहला पुरस्कार मिला और उसका नाम गाँव में हर किसी के दिल में बस गया।
अब गाँव के सभी लोग यह समझ गए कि सच्चा उपहार हमेशा पैसे या महंगी चीज़ों में नहीं, बल्कि प्यार, मेहनत और भावना में होता है।
राधा अब धीरे-धीरे खुद छोटे-छोटे खिलौने बनाने लगी। गाँव वाले उससे ही उपहार खरीदने लगे। राधा अपने बनाए हुए उपहार बेचकर अब अपनी आर्थिक समस्या से भी निजात पा चुकी थी।
✍️ योगेश गहतोड़ी "यश"
(ज्योतिषाचार्य)
मोबाईल: 9810092532
नई दिल्ली -110059
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