शिर्षक – चित्रा धारित
विधा – हास्य कविता
स्वरचित
चित्रा धारित आईं मंच पर,
हँसी लटक गई हर एक होठ पर।
चश्मा टेढ़ा, बिंदी सीधी,
बोली ऐसी—सीधी-मेढ़ी।
हाथ में मोबाइल, ज्ञान अपार,
“नेट नहीं है” — फिर भी प्रचार।
बोलीं, “मैं सरल सी नारी,”
पर बातों में पूरी तैयारी।
कभी हँसाती, कभी फँसाती,
हर बात में चुटकी काटी।
चित्रा धारित जाएँ जहाँ,
हँसी पहुँच जाए वहाँ-वहा
चित्रा धारित
चित्रा धारित
Please log in to post a comment.
No comments yet
Be the first to share your thoughts about this post!