कलम संगिनी

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स्वदेशी अपनाओ आत्म निर्भर भारत

स्वदेशी अपनाओ आत्म निर्भर भारत

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स्वदेशी अपनाओ आत्म निर्भर भारत
आत्म निर्भर भारत स्वतंत्रता मिली स्वदेशी मंत्रों से , देश की समृद्धि भी स्वदेशी से । विदेशी वस्तुओं को दूर भगाओ , स्वदेशी का डंका बजाओ । आओ सजाएं घर का कोना-कोना , हर गली ,हर घर में स्वदेशी ही होना । लोकमान्य तिलक का भी था यही नारा , स्वदेशी अपनाओ जग सारा । आजादी है अगर बचानी , पड़ेगी स्वदेशी सबको अपनानी। जब होता स्वदेशी वस्तुओं का प्रयोग , देश की अर्थव्यवस्था का सुदृण होता योग। किसान कारीगर को मिटा रोजगार, अर्थव्यवस्था की सुधार में हम भी बने भागीदार । स्वदेशी वस्तुओं से संस्कृति जीवित होती है , देश की समृद्धि और भी फलित होती है। महात्मा गांधी ने भी दिया संदेश आंदोलन में चरखा चलाकर , यह आंदोलन नहीं है अंग्रेज़ी भगाओ स्वदेशी अपनाकर। स्वरचित काव्य रचना प्रतिभा दिनेश कर विकासखंड सरायपाली जिला महासमुंद छत्तीसगढ़

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