कलम संगिनी

कलम संगिनी

हिंदी की गरिमा नीर गंगा सम

adi.s.mishra

adi.s.mishra

3 Followers 147 Posts Aug 2025

हिंदी की गरिमा नीर गंगा सम

46 Views
0 Likes 0 Comments
0 Saves
0 Shares
हिंदी की गरिमा नीर गंगा सम
हिन्दी की गरिमा नीर गंगा सम पर्यटक बन मैं भ्रमण कर रहा हूँ, हिन्दी साहित्य का आनंद ले रहा हूँ, मुझे प्रेम हो गया है कविता रचना से, शाश्वत सुख की अनुभूति ले रहा हूँ। हिन्दी कविता के नौ रस अति मोहक अलंकार व्याकरण बद्ध सम्मोहक, नव साहित्य सृजन का श्रेष्ठ धर्म, भुवन राममय में निर्वहन कर रहा हूँ। हिंदी मातृभाषा मेरी, हम सबकी, जननी सम प्रिय अति पावन लागै, शिशुपन, बचपन, यौवन की साथी, हिन्दी सदा मेरे आपके मन को भावै। पढ़ी, लिखी है अंग्रेज़ी भी सबने, पर संस्कृति की बेटी है रुचिकर, हिंदी भारतीय भाषाओं की अग्रजा को मिले राजभाषा का अधिकार। हिन्दी की गरिमा नीर गंगा सम, अति - पावन श्रेष्ठ औषधि सम, कल्पना, सोच, संकल्प, लेखनी, आदित्य सम्पूरित अभिलाषा मम। डॉ कर्नल आदि शंकर मिश्र ‘आदित्य’, ‘विद्यावाचस्पति’ लखनऊ

Comments (0)

Click to view
Footer