कलम संगिनी

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हिंदी: हमारी शान, हमारी पहचान

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हिंदी: हमारी शान, हमारी पहचान
*हिंदी: हमारी शान, हमारी पहचान"* (हिन्दी दिवस पर स्वरचित कविता) हिन्दी हमारी शान है, भारत की पहचान, सबके दिल को जोड़े रखे, देती हमें मान। गंगा-सी पावन हिन्दी, सरस्वती का वरदान, संस्कृति की गहराई में, संस्कृत की यह जान। विविधता के उपवन में, ये एकता का फूल, उत्तर-दक्षिण, पूरब-पश्चिम, सबको दे समभाव। हर बोली की खुशबू इसमें, सबका करे सत्कार, कभी न करती भेदभाव, देती सबको प्यार। माँ के प्रथम उद्गार-सी, ये अपनापन लाती, राष्ट्र की आत्मा बनकर, हमें पहचान दिलाती। आओ, इस दिवस पर हम, ये संकल्प उठाएँ, हिंदी की ज्योति से जग में, उजियारा फैलाएँ। भारतीयता के सुरों में, हिंदी है एक संगीत, आस्था के हर मंदिर में, इसकी मधुर प्रीत। भाषाओं के सागर में, हिंदी की शान निराली, जोड़ती हर संस्कृति को, हर बोली, हर गली। सद्भावना के संदेश संग, बढ़े राष्ट्र का मान, हिंदी दिवस पर गर्व करें, ये है भारत की जान। राष्ट्र-गान गूँजे ऐसे, नभ तक जयकार करें, हिन्दी, हिन्दू, हिन्दुस्तान – दिल से सत्कार करें। हिन्दी हमारी पहचान है, सबको जोड़े रखने वाली, इससे खिले एकता के फूल, हर गली-हर क्यारी। आओ मिलकर प्रतिज्ञा करें, इसका मान बढ़ाएँ, मां-बोली के सम्मान से, देश का नाम चमकाएँ। ✍️ योगेश गहतोड़ी "यश" (ज्योतिषाचार्य) मोबाईल: 9810092532 नई दिल्ली - 110059

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