कलम संगिनी

कलम संगिनी

जर्जर भवन, जर्जर भविष्य

अनोप भाम्बु

अनोप भाम्बु

2 Followers 1 Posts Aug 2025

जर्जर भवन, जर्जर भविष्य

100 Views
0 Likes 0 Comments
0 Saves
1 Shares
जर्जर भवन, जर्जर भविष्य
छत से टपकती हर बूंद कहे, “कब तक यूँ ही हाल रहे?” दीवारें उखड़ी, फर्श है फटा, भविष्य यहाँ बैठा कांपता। स्कूल की शक्ल अब डराती है, न कोई सुविधा, न आस दिखाती है। जिस कक्षा में गूंजे थे ज्ञान के गीत, वहाँ अब गूंजते हैं सन्नाटे के मीत। बेंच टूटी, ब्लैकबोर्ड धुंधला, पढ़ाई का सपना लगे अब धुआँधुआँ। ना पानी सही, ना शौचालय ठीक, फिर भी ये कैसी शिक्षा की भीड़? बच्चों की आँखों में अब वो चमक नहीं, क्योंकि व्यवस्था में कोई दमक नहीं। जो भविष्य थे, आज लाचार हैं, जर्जर भवनों में जैसे बीमार हैं। कहाँ है वह विकास का वादा? क्यों शिक्षा बन गई सिर्फ इरादा? सरकारी आँकड़ों में सब ठीक है, ज़मीनी सच्चाई बस नीरस संगीत है। अब भी समय है, संभल जाइए, इन ईंटों को फिर से जोड़ लाइए। क्योंकि अगर भवन मजबूत नहीं होंगे, तो सपने भी अधूरे ही रह जाएंगे। अनोप भाम्बु जोधपुर

Comments (0)

Click to view
Footer