*हिन्दी दिवस के उपलक्ष्य में*
कल 14 सितम्बर को हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में शुद्ध हिंदी का अभ्यास करता व्यक्ति :-
“मुझे भी आज हिंदी बोलने का शौक हुआ, घर से निकला और एक ऑटो वाले से पूछा, "तृचक्रीय चालक महोदय पूरे लखनऊ नगर के परिभ्रमण में कितनी मुद्रायें व्यय होंगी ?"
ऑटो वाले ने कहा, "साहब हिंदी में बोलिये।”
मैंने कहा, "श्रीमान, मै हिंदी में ही बोल रहा हूँ।"
ऑटो वाले ने कहा, "मोदी जी पागल करके ही मानेंगे। चलो बैठो कहाँ चलोगे ?"
मैंने कहा, "परिसदन चलो"
ऑटो वाला फिर चकराया !
"अब ये परिसदन क्या है ?”
बगल वाले श्रीमान ने कहा, "अरे सर्किट हाउस जाएगा"
ऑटो वाले ने सर खुजाया बोला, "बैठिये प्रभु"।
रास्ते में मैंने पूछा, “लखनऊ में कितने छवि गृह हैं ?"
ऑटो वाले ने कहा, "छवि गृह मतलब ?"
मैंने कहा, "चलचित्र मंदिर"।
उसने कहा, "यहाँ बहुत मंदिर हैं,
एस्कान मंदिर, बड़े हनुमान मंदिर,
मनकामेश्वर मंदिर, हनुमान सेतु मंदिर, लोक कल्याणेश्वर मंदिर", श्री गणपति धाम, श्री जन कल्यानेश्वर मंदिर” और भी बहुत हैं।
मैंने कहा, "भाई मैं चलचित्र मंदिर की बात कर रहा हूँ जिसमें नायक तथा नायिका ढिशुम ढिशुम करते हैं ..."
ऑटो वाला फिर चकराया, "ये चलचित्र मंदिर क्या होता है ?"
यही सोचते सोचते उसने सामने वाली गाडी में टक्कर मार दी।
ऑटो का अगला चक्का टेढ़ा हो गया और हवा निकल गई।
मैंने कहा, "तृचक्रीय चालक तुम्हारा अग्र चक्र तो वक्र हो गया ..."
ऑटो वाले ने मुझे घूर कर देखा और कहा, "उतरो जल्दी !”
आगे पंचर की दुकान थी हमने दुकान वाले से कहा....”हे तृचक्रीय वाहिनी सुधारक महोदय, कृपया अपने वायुभरण यंत्र से मेरे त्रिचक्र वाहिनी के द्वितीय चक्र में वायु भर दीजिये । धन्यबाद।”
दूकानदार बोला ! सुबह से बोहनी नहीं हुई और तुम श्लोक सुना रहे हो !
😬😬😬
तो भाइयो, बहनो, हँसना मना नहीं है, पर हिंदी हमारी मातृभाषा ही नहीं बल्कि संबिधान सम्मत राजभाषा भी है, आइये इसे लिखना बोलना तो सीखें लें।
डॉ कर्नल आदिशंकर मिश्र
‘आदित्य’, ‘विद्यावाचस्पति’
‘विद्यासागर’, लखनऊ
हिन्दी दिवस के उपलक्ष्य में
हिन्दी दिवस के उपलक्ष्य में
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