कलम संगिनी

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दुनिया में इतना खोखलापन क्यों है

adi.s.mishra

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दुनिया में इतना खोखलापन क्यों है

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दुनिया में इतना खोखलापन क्यों है
दुनिया में इतना खोखलापन क्यों मैं किसी से कमजोर नही हूँ, मैं बहुत कुछ कर सकती हूँ, सब डरते हैं कि कहीं कोमलता छोड़ मैं भयावह रूप न धर लूँ। मैं स्त्री हूँ मुझे हराया जाता है, परंतु मैं कदापि हारती नहीं हूँ, मुझे डराया जाता है परंतु मैं किसी से कभी डरती नहीं हूँ। हर क्षेत्र में आगे आगे आसमान छूने का संकल्प कर लिया है मैंने, मैं किसी से कम नहीं हूँ बस अपने को कम आँकना छोड़ दिया है मैंने। सच्चाई लिख सकती हूँ और मैं सच्चाई बोल भी सकती हूँ, डॉक्टर, इंजीनियर शिक्षिका हूँ, मैं पढ़ना व पढ़ाना सीख गईं हूँ। अधिकार व स्वाभिमान के लिए चुप कराने से भी चुप नहीं रहूँगी, बच्चे पैदा करूँगी व पालूँगी भी, परंतु अब मैं मशीन नहीं बनूँगी। स्त्री भी स्त्री के दुख का कारण है, जो दर्द जिया है अब तक स्त्री ने, बहू, बेटी बन, अब गृहस्वामिनी हैं, अपनी बहू बेटी की ढाल बननी हैं। समाज की बेड़ियाँ मत पहनाइये, इन्हें तोड़कर आगे बढ़ने दीजिये, बहू बेटी का शोषण मत करिये, घर समाज में उसे अधिकार दीजिये। समाज में जो कुकृत्य हो रहे हैं, उसमें भी स्त्रियों को बहन बेटी बहू को ही दोष दिया जाता है, किन्तु उनका इसमें दोष क्या है। समाज बना किससे हमसे आपसे, तो फिर ऐसी मानसिकता क्यों? आदित्य आइये जरा सोचिए इस दुनिया में इतना खोखलापन क्यों। डा. कर्नल आदि शंकर मिश्र ‘आदित्य’, ‘विद्यावाचस्पति’ लखनऊ

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