खुशबू : कैद, कहां, कभी, दीवारों में होती है ।
गर्दिश कहां किसी कश्ती की,किनारो में होती है।।
मौज : समंदर ने किए लहरों से जी भरकर।
कमबख्त गिनती अब दरिया की गुनाहगारों में होती है।
रह गए किसान के सब खेत गिरवी, ऐ दोस्त !
कि बारिशें इस जमाने में,अब फुहारों में होती है।।
क्या खूब थी राधे की, वो मोहन से लगन ।
ये प्यार,ये इश्क,ये मोहब्बत, सब अदाकारों में होती है।।
खता भी न थी गुनाह जिसमें, सजा कबूल किया हमने।
हश्र अपना जयचंद सोचें, चर्चे जिनके ईमानदारो में होती है ।।
खुशबू : कैद, कहाँ, कभी, दीवारों में होती है 😊
खुशबू : कैद, कहाँ, कभी, दीवारों में होती है 😊
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