शिर्षक- मोवाइस
कविता
मौलिक रचना
बारिश की बरसात में डूबी वो मिट्टी
की महक,
बचपन की खोई हुई हंसी को फिर से जगा जाती है,
मोवाइस छुअन, जैसे पिता की थकी हुई आंखों का स्पर्श,
दिल की गहराइयों से निकलती वो सिसकियां, आंसू बन बहतीं,
फूलों की आहें, पत्तों की बेबस पुकार,
धरती की छाती में दफन वो अनंत दर्द का सागर।
रचनाकार
कौशल
छत्तीसगढ़
29.01.2026
मोवाइस
मोवाइस
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