भारत की नारी
भारत की नारी शक्ति का
अवतार होती है,
गंगा की निर्मल धार होती है,
सद्गुणों की खान होती है।
कभी फूल कभी चट्टान होती है।
परिवार चक्र की धुरी होती है नारी,
गृहस्थी की सुदृढ़ नींव होती है नारी।
मां बहन बेटी पत्नी विभिन्न रूपों में,
भली भांति भूमिका
निभाने वाली होती है नारी।
बच्चों के लिए प्यार और
अनुशासन की सजीव मूर्ति होती है।
पति के भाग्य को बनाने
वाली तस्वीर होती है।
परिवार को सुन्दर सुघर सजाने संवारने वाली कुशल कलाकार होती है।
रिश्ते नाते निभाने में व्यवहार
कुशल होती है।
आस्था विश्वास प्रेम भक्ति की
आगार होती है।
सृष्टि कर्ता की अनमोल कृति है नारी।
सृजनकर्ता की चौरासी लाख कृतियों
में सब पर भारी पड़ती है नारी।
मानो विधाता ने अपनी सारी
कर्म कुशलता और निपुणता को
अपनी एक ही कलाकृति में
समाहित कर दिया है।
प्रेम स्नेह, दया, क्षमा, करुणा, वात्सल्य, धर्मशीलता, क्रोध, कठोरता, दृढ़ता, उग्रता, उद्विगनता सभी गुण-अवगुण को एक ही प्रतिमा नारी को साकार स्वरूप दे दिया है।
दिव्य देवी रूप में सदा पूज्य है नारी,
वंदनीय है नारी शक्ति पुंज है नारी।
सुभद्रा द्विवेदी, लखनऊ
*भारत की नारी*
*भारत की नारी*
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