कलम संगिनी

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कर राष्ट्र का उद्धार तू!

पी.यादव ओज

पी.यादव ओज

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कर राष्ट्र का उद्धार तू!

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कर राष्ट्र का उद्धार तू! शस्य-श्यामला धरा तेरी, माता का कर श्रृंगार तू। कोटि-कोटि स्वर्ग बसा, कर वंदन बारंबार तू।। बूंद-बूंद निज रक्त का, बहा वतन के नाम तू। सर्वस्व समर्पण है यही, राष्ट्र-धर्म को पहचान तू।। जीवन का लक्ष्य यही है, राष्ट्र-प्रेम को जान तू। तप यही है-सिद्धि यही, सांस-सांस कुर्बान तू।। धिक्कार रहा है मन तेरा, कर्तव्य से क्यों अनजान तू? मातृभूमि-रक्षा की खातिर, दे निज यौवन बलिदान तू।। जन्म का उद्देश्य यही है, मृत्यु स्वयं की तार तू। राष्ट्रीयता का मंत्र यही है, कर राष्ट्र का उद्धार तू।। -।।'ओज'।।-

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