कलम संगिनी

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कविताएं (12)

धर्मशाला-डलहौज़ी यात्रा का सुकून

दो दशक का इंतज़ार, वर्षों का सुकून दे गया — डलहौजी और धर्मशाला प्रवास जीवन में कुछ यात्राएँ केवल घूमने-फिरने के लिए नहीं होतीं, वे एक लंबे समय से संज...
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शहद की मिठास

विर्षक- शहद की मिठास विधा -कविता मौलिक रचना पीली किरणों में छुपी वो मिठास, फूलों की आत्मा से बनी अमृत की धारा, मधुमक्खियों की मेहनत में ब...
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फूल और भंवरा

कहानी फूल और भंवरा स्वरचित एक चांदनी रात से सजे उस जादुई बाग में, जहां हर पत्ता प्रेम की सांस लेता था और हवाएं दिलों की धड़कनों को गुनगुनाती थ...
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परसा के फूल

विषय - परसा के फूल छत्तीसगढ़ी कविता – मौलिक रचना परसा के फूल फूले हे, रंग-रंग के बहार, डहर-डहर महके हे, जंगल के सिंगार। लाल-पीयर अँचरा जइ...
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गुंजन

"गुंजन" फूलों के आँगन में मधुमक्खी का गान, पंखों की लय में बँधा जीवन का तान। मौन भी बोले जब मन हो अनुरंजन, प्रकृति की गोद में गूँज उठे...
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ऐसी ज्योति जले

*ऐसी ज्योति जले* ऐसी ज्योति जले हे भगवन दशो दिशा का मिटे अंधेरा, ज्योतिर्मय हो धरती अम्बर रहे न किंचित कहीं अंधेरा। ऐसी गंग बहा दो भगवन स...
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सत्संगति: कथय किमंकरोति पुंषाम्

*सत् संगति: कथय किम् न करोति पुंषाम्* जाड्यं धियो हरति सिञ्चति वाचि सत्यं, मान्नोनतिं दिशति पापमपकरोति। चेतः प्रसादयति दिक्षु तनोति कीर्तिं, स...
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मुझे बचाओ

शिर्षक – मुझे बचाओ कविता प्रकृति स्वरचित रचनाकार – कौशल --- दर्द की राहों में डूबा मन, हाँफ रहा टूटी सांसों में, टूटे सपने जलते भीतर, ज...
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जुगनू

शिर्षक -जुगनू विधा -कविता श्रेणी - प्रेरणादायक मौलिक रचना रचनाकार -कौशल रात के अंधेरे में चमकता, छोटा सा जुगनू उड़ता फिरता। कोई बड़...
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खेत की मिट्टी

शिर्षक - खेत की मिट्टी कविता - प्रकृति - धरती की गोद में, मिट्टी का आलम, जीवन की धड़कन, सृष्टि का संबलम। सूरज की तपन, चाँदनी का आलिंगन, ...
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🌾 अन्नप्राशन संस्कार 🌾

🌾 अन्नप्राशन संस्कार 🌾 भारतीय संस्कृति में मानव जीवन को आरंभ से ही संस्कारों की पवित्र श्रृंखला से जोड़ा गया है। इन सोलह संस्कारों में से सातवां स...
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हमारे जीवन की धार्मिक यात्रा

*कल्पकथा* *धार्मिक यात्रा वृत्तान्त* दिनांक:7-11-2025 मेरी धार्मिक यात्रायें मेरे बचपन से ही प्रारम्भ हो गई थीं। मेरे गांव में घर के सामने ही कूट...
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लेखक (1)

HARNARAYAN KURREY

HARNARAYAN KURREY

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